सुप्रीम कोर्ट का नया निर्णय: चेक बाउंस में अब शिकायत कहाँ दायर होगी?
भारत में चेक बाउंस मामलों से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया लंबे समय से विवाद और जटिलताओं का विषय रही है। Negotiable Instruments Act की धारा 138 के अंतर्गत दर्ज होने वाली शिकायतों के लिए territorial jurisdiction को लेकर कई बार भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती रही। इसी संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय ने Jai Balaji Industries Ltd. बनाम HEG Ltd. मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, जिसने चेक बाउंस मामलों में jurisdiction को लेकर पूर्ण स्पष्टता प्रदान की है।
मामले की पृष्ठभूमि
HEG Ltd., जिसका पंजीकृत कार्यालय भोपाल में है, ने Jai Balaji Industries Ltd., जो कोलकाता स्थित कंपनी है, को कुछ माल की आपूर्ति की। भुगतान हेतु आरोपी कंपनी ने कोलकाता शाखा से एक चेक जारी किया, जिसे HEG Ltd. ने अपनी भोपाल स्थित SBI शाखा में जमा किया। अगले ही दिन चेक “Funds Insufficient” टिप्पणी के साथ लौट आया। इस प्रकार धारा 138 के अंतर्गत विधिक प्रक्रिया आरंभ हुई।
प्रारंभिक शिकायत 2014 में कोलकाता अदालत में दायर हुई, क्योंकि उस समय सुप्रीम कोर्ट के Dashrath Rathod निर्णय के अनुसार jurisdiction वही था जहाँ से चेक dishonour हुआ। बाद में 2015 Amendment ने इस कानून को पूरी तरह बदल दिया।
2015 Amendment: Jurisdiction में बड़ा परिवर्तन
संसद ने Negotiable Instruments (Amendment) Act, 2015 पारित किया, जिसमें Section 142(2) और Explanation का समावेश किया गया। अब चेक बाउंस शिकायत वहीं दायर होगी — जहाँ payee अर्थात शिकायतकर्ता का बैंक खाता स्थित हो।
Explanation के अनुसार, भले ही चेक किसी अन्य शाखा में जमा किया गया हो, उसे payee की “home branch” में जमा माना जाएगा। यह बदलाव complainant की सुविधा और प्रक्रियागत सरलता को ध्यान में रखते हुए किया गया।
नया मुकदमा और विवाद
2015 Amendment लागू होने के बाद HEG Ltd. ने कोलकाता में लंबित शिकायत वापस लेकर भोपाल में नई शिकायत दर्ज की। Jai Balaji Industries Ltd. ने इस नई शिकायत को चुनौती दी और यह तर्क दिया कि Amendment पूर्वव्यापी नहीं होना चाहिए।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चूँकि कोलकाता में सुनवाई आगे बढ़ चुकी थी, शिकायत को बदलना विधिसंगत नहीं है। इसी विवाद के परिणामस्वरूप मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा।
सर्वोच्च न्यायालय की विस्तृत व्याख्या
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टरूप से कहा कि 2015 Amendment complainant की सुविधा के लिए है और यह पूरे देश में एकरूपता बनाए रखने हेतु लाया गया था। अब केवल एक ही आधार पर jurisdiction तय होगा — payee का बैंक खाता।
Dishonour होने का स्थान अब कोई महत्त्व नहीं रखता। यह व्याख्या आधुनिक बैंकिंग प्रणाली को ध्यान में रखते हुए की गई जिसमें clearing का स्थान अलग हो सकता है।
क्यों कोलकाता वाली पुरानी शिकायत अप्रासंगिक थी?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुरानी Complaint वापस ली जा चुकी थी, इसलिए उसका कोई प्रभाव नहीं रह जाता। नई Complaint पूरी तरह से स्वतंत्र है और इसे नए कानून (2015 Amendment) के आधार पर ही देखा जाएगा। इसलिए Evidence रिकॉर्ड होने का तर्क टिकाऊ नहीं था।
अंतिम निर्णय: किसके पास jurisdiction?
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में भोपाल अदालत के पास ही वैध Territorial Jurisdiction है। Complaint को अन्यत्र स्थानांतरित करने का कोई आधार नहीं मिला। इस प्रकार Transfer Petition को अस्वीकार कर दिया गया।
इस निर्णय का व्यापक प्रभाव
यह फैसला न केवल HEG Ltd. और Jai Balaji Industries मामले में, बल्कि पूरे देश की व्यावसायिक इकाइयों और व्यक्तियों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है।
अब चेक बाउंस Complaint दायर करने के लिए शिकायतकर्ता को accused के शहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे समय, धन, और संसाधनों की बड़ी बचत होती है।
आधुनिक बैंकिंग और कानूनी सरलता
Amendment ने तकनीकी वास्तविकताओं को समझते हुए home branch प्रणाली को आधार बनाया। चेक कहीं भी जमा हो सकता है, पर शिकायतकर्ता के बैंक को jurisdiction देना प्रक्रिया को सरल और एकरूप बनाता है।
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निष्कर्ष (Schema-Friendly)
यह निर्णय भारत में चेक बाउंस मामलों की jurisdiction को लेकर पूर्ण स्पष्टता प्रदान करता है। अब शिकायत वहीँ दायर होगी जहाँ शिकायतकर्ता का बैंक खाता है, और न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुगम, पारदर्शी और complainant-oriented हो गई है।
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